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कबतक लूटते रहेंगे ये हमें ?

सन 1947 गोरे अँगरेज़ भारत छोड़कर प्रतक्ष रूप से चले गए थे किन्तु वे आज भी अप्रतक्ष रूप से भारत पर आज भी राज कर रहे हैं . तब के अंग्रेज ब्रिट्रेन से थे , आज अंग्रेजों का फैलाब कोई रूपों में हैं . भोपाल गैस हत्या कांड के आरोपी के रूप में , राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सेदारों के रूप में सुरेश कलमाड़ी के साथी बनकर आज भी देश का धन लूटने में लगे हैं.
दरअसल गोरे अंग्रेजों के जाने के बाद से ही उनके चमचे और दलाल प्रबृति के देशी काले अंग्रेजों ने देश की सत्ता कब्जाने की होड़ शुरु कर दिया था और आज  देश पर उनका पूर्णरूप से कब्ज़ा है . जी भर कर लूट रहे हैं , कोई पूछने  वाला नही और यदि पूछा जाता है तो कोई जबाव देही नही . कबतक लूटते रहेंगे ये हमें ? सवाल अनेक हैं किन्तु उत्तर कहाँ मिलेगा यह नही पता हमें .
आज घर के दुश्मनों ने ही घर पर अधिकार जमा लिया है. जब हमारे अपने ही हमनें लूटने लगे तो शिकायत किस्से करें हम ?
इस साम्राज्यवाद को आप क्या नाम देंगे ?

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सरकार मूक किउन है ?

२ अगस्त को   रोज की तरह टी.वी. अनेक समाचार थे. रास्ट्रमंडल खेलो में  कलमाड़ी और कांग्रेस का घोटाला , रांची में बजरंगदल और विश्व  हिन्दू  परिसद के गुंडों का युवाओं पर हमला, गुजरात , आदि- आदि . किन्तु  जिस समाचार ने मुझे विचलित  किया वह था I.C.S.I. बोर्ड द्वारा  यह अधिसूचना जारी करना कि उनके विद्यालयों में अब शहीद भगत सिंह को नही पढ पायेंगे  बच्चे किउनी  भगत सिंह देशभक्त नही आतंकवादी थे  .
        यह समाचार आज तक पर था . ICSE  ने यदि एसा कहा है तो यह तमाम स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है यह भारत का अपमान है . और यदि यह समाचार सच  है कि हैदराबाद के स्कूलों में अब बच्चो को भगत सिंह के  नही के बारे में नही  बताया  जायेगा  , तो मैं  इससे बोर्ड  को अंग्रेजों का गुलाम और  दलाल  मानता हूं .
सरकार की तरफ  से अभी कोई प्रतिक्रिया नही आयी है , और न  ही आने की आशा है, किउंकि इस देश के इतिहास पर तो एक दल और परिवार विशेष का कब्ज़ा है .
 हैरानी इस बात पर भी है कि आज जो अपने को शिक्षक कहते हैं उन्होंने भी इस निर्णय का विरोध नही किया . क्या  सब शिक्षक और इतिहासकार दुकानदार और गुलाम है इनमे सच बोलने का साहस ह…